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राजस्थान में डेंगू-मलेरिया को लेकर अलर्ट, मानसून से पहले केंद्र सरकार ने राज्यों को दिए सख्त निर्देश

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जयपुर/नई दिल्ली, 19 जून। राजस्थान समेत पूरे देश में मानसून की दस्तक से पहले डेंगू और मलेरिया जैसी मच्छर जनित बीमारियों को लेकर केंद्र सरकार अलर्ट मोड पर आ गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक कर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बीमारी की रोकथाम, निगरानी और उपचार व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए।

नई दिल्ली में आयोजित बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने आगामी मानसून और मानसून के बाद के महीनों में डेंगू एवं मलेरिया के संभावित खतरे को देखते हुए समय रहते तैयारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र, राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय से ही इन बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।

बैठक में राज्यों को निगरानी तंत्र मजबूत करने, संदिग्ध मामलों की तत्काल रिपोर्टिंग, सक्रिय सर्विलांस और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही अस्पतालों में दवाइयों, जांच सुविधाओं, रक्त की उपलब्धता, पर्याप्त बेड और प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया गया।

केंद्रीय मंत्री ने डेंगू और मलेरिया के मानक उपचार प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने के निर्देश देते हुए कहा कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों को नवीनतम दिशा-निर्देशों की जानकारी दी जाए ताकि मरीजों को समय पर और बेहतर उपचार मिल सके।

राजस्थान जैसे राज्यों में जहां मानसून के दौरान जलभराव और मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की आशंका रहती है, वहां विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। केंद्र सरकार ने नगर निकायों और पंचायतों को मच्छरों के पनपने वाले स्थानों को नष्ट करने, फॉगिंग अभियान तेज करने और जनभागीदारी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

बैठक में जनजागरूकता अभियान को और प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया। लोगों से घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देने, साफ-सफाई बनाए रखने, मच्छरदानी और अन्य बचाव उपाय अपनाने तथा बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की गई है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार भारत ने पिछले एक दशक में मलेरिया नियंत्रण के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। वर्ष 2015 से 2025 के बीच मलेरिया के मामलों और उससे होने वाली मौतों में लगभग 80 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। देश के 160 जिलों में वर्ष 2022 से 2025 के दौरान मलेरिया का एक भी स्थानीय मामला सामने नहीं आया है।

केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को जिला स्तर पर नियमित समीक्षा, हॉटस्पॉट मैपिंग, लार्वा नियंत्रण, त्वरित जांच और उपचार व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं ताकि मानसून सीजन के दौरान किसी भी संभावित प्रकोप को समय रहते रोका जा सके।

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