चिकानी स्थित लॉर्ड्स विश्वविद्यालय में फॉरेंसिक विज्ञान जागरूकता कार्यशाला, विशेषज्ञों ने करियर और क्राइम इन्वेस्टिगेशन की दी अहम जानकारी
अलवर, 18 जुलाई 2026
चिकानी स्थित लॉर्ड्स विश्वविद्यालय में शनिवार को फॉरेंसिक विज्ञान जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपराधों की वैज्ञानिक जांच, आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों और न्यायिक प्रक्रिया में फॉरेंसिक विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका से परिचित कराना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. डॉ. पंकज अरोड़ा ने किया। इस अवसर पर प्रो. डॉ. स्नेह साईवाल, डीन अकादमिक्स एवं डायरेक्टर रिसर्च, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में फॉरेंसिक विज्ञान अपराधों के खुलासे और न्याय दिलाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। इस क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार और शोध की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने फिंगरप्रिंट विश्लेषण, डीएनए जांच, डिजिटल फॉरेंसिक सहित विभिन्न आधुनिक तकनीकों की जानकारी साझा की। विद्यार्थियों को बताया गया कि वैज्ञानिक साक्ष्य किस प्रकार अपराधों की जांच को मजबूत बनाते हैं और न्यायिक प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. प्रियंका शर्मा, डीन, विज्ञान संकाय के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यशाला की समन्वयक सलोनी अग्रवाल एवं सह-समन्वयक चिराग धनकड़ रहे।
इस अवसर पर डॉ. नीतू यादव, डॉ. मीनाक्षी बिंदल, डॉ. एस. के. पाठक, डॉ. घनश्याम सैनी, डॉ. सविता गुप्ता, डॉ. नितिन मित्तल सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के डीन, प्राध्यापक एवं विज्ञान संकाय के शिक्षक उपस्थित रहे।
कार्यशाला में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और इसे ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक तथा भविष्य के करियर के लिए उपयोगी बताया।
