अलवर, 2 अक्टूबर 2026। सरिस्का की खूबसूरत अरावली वादियों के बीच स्थित उदयनाथ धाम आस्था के साथ-साथ सेवा और प्रकृति के लिए भी अपनी अलग पहचान रखता है। पहाड़ियों, हरियाली और शांत वातावरण के बीच स्थित यह धाम श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक आस्था का केंद्र है, वहीं यहां होने वाले सेवा कार्य भी लोगों को आकर्षित करते हैं।
नाथ परंपरा से जुड़ा है उदयनाथ धाम
उदयनाथ धाम को नाथ परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है। प्रचलित नाथ परंपरा में उदयनाथ को शक्ति और मां पार्वती के स्वरूप से जोड़ा जाता है। नाथ परंपरा की अलग-अलग मान्यताओं और सूचियों में नामों में अंतर मिलता है, लेकिन उदयनाथ का संबंध शक्ति स्वरूप से बताया जाता है।
सरिस्का की प्राकृतिक वादियों के बीच स्थित होने के कारण यहां आने वाले श्रद्धालुओं को धार्मिक वातावरण के साथ प्रकृति की शांति भी महसूस होती है।
गुरु परंपरा और सेवा कार्य
उदयनाथ धाम की स्थानीय परंपरा में संतों और गुरुओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। फूलनाथ जी महाराज के बाद किसानाथ जी महाराज ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया और वर्तमान में फूलनाथ महाराज जी की देखरेख में धाम से जुड़े सेवा कार्य आगे बढ़ रहे हैं।
समय के साथ धाम में धार्मिक गतिविधियों के साथ समाजसेवा और प्रकृति संरक्षण से जुड़े कार्यों पर भी जोर दिया गया है।
गौशाला से लेकर भोजन और चाय-पानी की सेवा
उदयनाथ धाम में गौशाला भी संचालित है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं और जरूरतमंद लोगों के लिए भोजन, चाय और पानी की सेवा की जाती है। इन सेवाओं में सेवादार अपनी भूमिका निभाते हैं।
धाम में होने वाली यह सेवा व्यवस्था यहां आने वाले लोगों के लिए आकर्षण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। धार्मिक स्थल पर दर्शन के साथ सेवा का यह रूप लोगों को अलग अनुभव देता है।
हजारों पेड़-पौधों से बदल रहा है धाम का स्वरूप
उदयनाथ धाम परिसर और आसपास के क्षेत्र में बड़ी संख्या में पेड़ लगाए गए हैं। इनमें पीपल, बरगद सहित कई अन्य प्रजातियों के पेड़ शामिल हैं।
इन पौधों के बड़े होने के साथ आने वाले वर्षों में क्षेत्र का स्वरूप और अधिक हरा-भरा होने की उम्मीद है। अरावली की प्राकृतिक पहाड़ियों के बीच हरियाली बढ़ने से धाम की सुंदरता भी और निखर सकती है।
कुंड में खिले कमल भी आकर्षण का केंद्र
धाम परिसर में बने पानी के कुंड में खिले कमल के फूल भी यहां आने वाले लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं। प्राकृतिक वातावरण के बीच कमल से सजा यह कुंड धाम की खूबसूरती में एक और रंग जोड़ता है।
आस्था, सेवा और प्रकृति का संगम
उदयनाथ धाम को सिर्फ एक धार्मिक स्थल के रूप में देखने के बजाय यहां होने वाले सेवा और प्रकृति संरक्षण के प्रयासों को भी देखा जा सकता है। नाथ परंपरा, संतों की गुरु परंपरा, गौसेवा, श्रद्धालुओं के लिए भोजन और चाय-पानी की सेवा तथा बड़ी संख्या में लगाए गए पेड़ इस धाम को एक अलग पहचान देते हैं।
सरिस्का की शांत वादियों में स्थित उदयनाथ धाम आज आस्था के साथ सेवा और प्रकृति से जुड़ी गतिविधियों के कारण भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
रिपोर्ट: मनीष बावलिया, पत्रकार, अलवर
