मनीष बावलिया /अलवर, 26 अगस्त। नगर निगम अलवर के चुनावी रण में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। 65 वार्डों में होने वाले चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस में टिकट के दावेदारों ने पूरी ताकत झोंक दी है। दोनों प्रमुख दलों में प्रत्याशियों के चयन को लेकर मंथन का दौर जारी है और टिकट की घोषणा को लेकर दावेदारों की नजरें पार्टी नेतृत्व पर टिकी हुई हैं।
टिकट की आधिकारिक घोषणा से पहले ही शहर के वार्डों में चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं। संभावित प्रत्याशी जनसंपर्क में जुटे हैं और अपने-अपने स्तर पर राजनीतिक समीकरण साधने में लगे हैं।
65 वार्डों में टिकट के लिए दावेदारों की लंबी कतार
नगर निगम के 65 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस से टिकट की दावेदारी को लेकर बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता सक्रिय हैं। कई वार्डों में एक से अधिक मजबूत दावेदार सामने आने के कारण दोनों दलों के लिए प्रत्याशी चयन चुनौती बना हुआ है।
दावेदार पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और संगठन के पदाधिकारियों से संपर्क कर अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। वहीं कई संभावित प्रत्याशी वार्ड में जनसंपर्क और बैठकों के जरिए अपना समर्थन दिखाने का प्रयास कर रहे हैं।
टिकट से पहले ही शुरू हुआ जनसंपर्क
प्रत्याशियों की घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन चुनावी माहौल शहर के वार्डों में दिखाई देने लगा है। संभावित प्रत्याशी लोगों से संपर्क कर रहे हैं और स्थानीय स्तर पर बैठकों का दौर भी जारी है।
भाजपा और कांग्रेस दोनों में टिकट को लेकर अंदरूनी स्तर पर बैठकों और विचार-विमर्श का दौर चल रहा है। पार्टी नेतृत्व के सामने जातीय, सामाजिक और स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए प्रत्याशियों के चयन की चुनौती है।
मेयर की कुर्सी पर भी नजर
नगर निगम चुनाव में वार्ड पार्षद की टिकट के साथ मेयर पद को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। दोनों दलों के नेताओं की नजर नगर निगम की सत्ता पर है। मेयर की कुर्सी के लिए संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर भी पार्टी स्तर पर रणनीति बनाई जा रही है।
हालांकि मेयर पद को लेकर अंतिम तस्वीर चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन राजनीतिक गलियारों में संभावित दावेदारों और समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं।
टिकट कटने पर बगावत का भी खतरा
भाजपा और कांग्रेस के सामने टिकट वितरण के बाद संभावित बगावत को रोकना भी बड़ी चुनौती होगी। एक ही वार्ड से कई दावेदार होने के कारण टिकट किसी एक को मिलने पर दूसरे दावेदारों की नाराजगी सामने आ सकती है।
ऐसे में दोनों दलों के संगठन के सामने नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ बनाए रखने की चुनौती रहेगी। टिकट की घोषणा के बाद डैमेज कंट्रोल के लिए वरिष्ठ नेताओं की भूमिका अहम मानी जा रही है।
अगले कुछ दिन होंगे अहम
नगर निगम चुनाव को लेकर नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले भाजपा और कांग्रेस में प्रत्याशी चयन का दौर निर्णायक चरण में पहुंच गया है। अब सभी की नजर पार्टी की आधिकारिक सूची पर है।
टिकट की घोषणा के साथ ही अलवर के 65 वार्डों में चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी। इसके बाद टिकट पाने वाले प्रत्याशियों के साथ टिकट से वंचित दावेदारों की अगली रणनीति भी शहर की सियासत को प्रभावित कर सकती है।
अब नजर इस बात पर है कि भाजपा और कांग्रेस किस वार्ड से किस चेहरे पर दांव लगाती हैं और टिकट वितरण के बाद अलवर की चुनावी राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।
