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राजस्थान में बदलेगा पुलिसिंग का अंदाज, DGP राजीव कुमार शर्मा बोले- थाने में वैसा ही व्यवहार करें, जैसा खुद के लिए चाहते हैं

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जयपुर 15। राजस्थान पुलिस में आमजन के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने, संवाद को बेहतर बनाने और पुलिस पर जनता का विश्वास मजबूत करने के लिए विशेष पहल शुरू की गई है। राजस्थान पुलिस के महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने गुरुवार को जयपुर स्थित आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी में ‘पॉजिटिव बिहेवियर इन पुलिसिंग’ प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। तीन दिवसीय यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें 35 पुलिसकर्मी भाग ले रहे हैं।

डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि थाने में आमजन के साथ वैसा ही व्यवहार किया जाना चाहिए, जैसा वे स्वयं अपने लिए चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्यशैली में अपराधियों के प्रति सख्ती और आमजन के प्रति संवेदनशीलता का संतुलन जरूरी है। पुलिसकर्मियों का व्यवहार ऐसा होना चाहिए, जिससे शिकायत लेकर आने वाले व्यक्ति को अपनी बात रखने का उचित अवसर मिले और उसे कानून के दायरे में राहत मिल सके।

आमजन के प्रति संवेदनशीलता, अपराधियों पर सख्ती

कार्यक्रम में डीजीपी ने कहा कि राजस्थान पुलिस के आमजन के प्रति संवेदनशील व्यवहार और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की पूरे देश में चर्चा है। पुलिस की इस सकारात्मक और पेशेवर छवि को बनाए रखना सभी पुलिसकर्मियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि आमजन अपनी समस्याओं और परेशानियों को लेकर पुलिस थानों में पहुंचते हैं। ऐसे में पुलिसकर्मियों को उनकी बात ध्यानपूर्वक सुननी चाहिए और विधिक प्रक्रिया के तहत सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास करना चाहिए। संवेदनशीलता का अर्थ कानून के पालन में नरमी बरतना नहीं, बल्कि कानून के अनुसार पीड़ित को राहत दिलाने के लिए गंभीरता से प्रयास करना है।

डीजीपी ने पुलिसकर्मियों से आग्रह किया कि वे आमजन की जगह खुद को रखकर सोचें। यदि वे स्वयं किसी समस्या को लेकर थाने पहुंचें, तो पुलिस से किस तरह के व्यवहार की अपेक्षा करेंगे। इसी सोच के साथ आमजन से संवाद करना चाहिए।

सकारात्मक व्यवहार से मजबूत होगा पुलिस और जनता के बीच विश्वास

डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि पुलिसकर्मियों को लंबी ड्यूटी, त्वरित निर्णय लेने और लगातार बदलती चुनौतियों के बीच काम करना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में स्पष्ट संवाद, सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार, धैर्य और कानून के प्रति प्रतिबद्धता बेहद महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पुलिस का आचरण और कार्यप्रणाली लगातार लोगों की नजर में रहती है। इसलिए पुलिसकर्मियों को अपनी कार्यशैली में पारदर्शिता बनाए रखने के साथ ही थानों में सकारात्मक माहौल विकसित करना चाहिए। पुलिस और आमजन के बीच बेहतर संवाद से शिकायतों को समझने, समस्याओं के समाधान और विश्वास कायम करने में मदद मिल सकती है।

तीन दिन के प्रशिक्षण में व्यवहार और संवाद पर विशेष जोर

आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में पुलिसिंग को अधिक नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए केस स्टडी, भूमिका-अभिनय, समूह चर्चा और आत्म-चिंतन जैसी गतिविधियों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य पुलिसकर्मियों को अपने व्यवहार का मूल्यांकन करने और दैनिक कार्यप्रणाली में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए तैयार करना है।

प्रशिक्षण के दूसरे दिन शुक्रवार को ‘दबाव की परिस्थितियों में पुलिसिंग’ विषय पर चर्चा होगी। इसमें कार्य के दौरान तनाव को समझने, भावनात्मक परिस्थितियों में संयम बनाए रखने, प्राथमिकताएं तय करने और नागरिकों के साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। नाराज शिकायतकर्ताओं और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने के लिए भूमिका-अभिनय तथा समूह अभ्यास भी कराए जाएंगे।

तीसरे दिन शनिवार को ‘सीख से सकारात्मक पुलिसिंग की ओर’ विषय के तहत प्रशिक्षण में प्राप्त अनुभवों को व्यवहार में लागू करने पर ध्यान दिया जाएगा। इसमें प्रभावी संवाद, सक्रिय रूप से सुनने, आपसी संबंध मजबूत करने और नागरिकों के साथ विश्वासपूर्ण संबंध विकसित करने के व्यावहारिक तरीकों पर काम होगा।

पूर्व डीजीपी ने बताया आत्मचिंतन का मंच

कार्यक्रम में राजस्थान के पूर्व डीजीपी डॉ. एम.के. देवराजन ने कहा कि यह आयोजन केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का मंच भी है। उन्होंने प्रतिभागियों से अपने विचार खुलकर रखने और अनुभव साझा करने का आह्वान किया। उन्होंने पुलिस सुधारों के लिए पूर्व में किए गए प्रयासों की जानकारी भी दी।

कार्यक्रम में एचआरडी रिसर्च फाउंडेशन के चेयरमैन अपूर्व कुमार ने स्वागत संबोधन दिया, जबकि विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. पी.आर. सोढाणी ने आभार व्यक्त किया।

प्रशिक्षण के समापन पर पुलिसकर्मियों की व्यक्तिगत और इकाई स्तर की कार्ययोजनाएं तैयार की जाएंगी, ताकि प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई बातों को वास्तविक पुलिसिंग में लागू किया जा सके। इस पहल का प्रमुख उद्देश्य पुलिस के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना और आमजन के साथ बेहतर संवाद एवं विश्वास को मजबूत करना है।

 

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