अलवर, 27 अगस्त 2026। मुंडावर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक, सहकारितारत्न, साहित्यकार, एवं कवि तथा वरिष्ठ कांग्रेस नेता महेंद्र शास्त्री का 95 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से अलवर जिले सहित मुंडावर क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया है।

महेंद्र शास्त्री लंबे समय तक सक्रिय राजनीति के साथ सहकारिता और साहित्य के क्षेत्र से जुड़े रहे। वर्ष 1985 में उन्होंने लोकदल के टिकट पर मुंडावर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर राजस्थान विधानसभा में प्रवेश किया था। चुनावी रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने 25,520 मत प्राप्त कर कांग्रेस प्रत्याशी जसवंत सिंह को 2,224 मतों से हराया था।
कांग्रेस के ‘भीष्म पितामह’ के रूप में थी पहचान
महेंद्र शास्त्री की पहचान कांग्रेस के पुराने और गहरे जानकार नेताओं में होती थी। पार्टी के भीतर उन्हें वरिष्ठ मार्गदर्शक और ‘भीष्म पितामह’ के रूप में सम्मान मिलता था। लंबे राजनीतिक अनुभव के चलते क्षेत्र की राजनीति और कांग्रेस संगठन से जुड़े मामलों में उनकी राय को काफी महत्व दिया जाता था।
शास्त्री अपने बेबाक और स्पष्ट अंदाज के लिए भी जाने जाते थे। उनके बारे में कहा जाता था कि उनकी बोली सटीक थी और जो बात बोल देते थे, उस पर कायम रहते थे।

राजनीति के साथ-साथ साहित्य से उनका गहरा जुड़ाव रहा। वे साहित्यकार और कवि के रूप में भी अपनी अलग पहचान रखते थे। उन्होंने यादों की महक, चलते – चलते कहा आ गए, मानव मन अकथ कहानी सहित कई किताबें भी लिखी। सहकारिता के क्षेत्र में योगदान के चलते उन्हें सहकारितारत्न के सम्मान से भी नवाजा गया था।
अंतिम यात्रा आज शाम 4 बजे
जानकारी के अनुसार महेंद्र शास्त्री की अंतिम यात्रा आज शाम 4 बजे उनके पैतृक निवास मोती डूंगरी से भूरा सिद्ध के लिए रवाना होगी, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
उनके निधन पर क्षेत्र के लोगों ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि महेंद्र शास्त्री का जाना अलवर की राजनीति, सहकारिता और साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
