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हल्दीघाटी युद्ध के 450 वर्ष पूर्ण होने पर जयपुर में शिल्प प्रदर्शनी का शुभारंभ, राज्यपाल बोले- महान इतिहास देता है ऊर्जा और प्रेरणा

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जयपुर, 14 जून। वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के शौर्य और हल्दीघाटी युद्ध की गौरवगाथा को समर्पित “शिल्प प्रदर्शनी” का रविवार को राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने शुभारंभ किया। मूर्तिकार महावीर भारती की पहल पर आयोजित इस विशेष प्रदर्शनी में हल्दीघाटी युद्ध से जुड़े वीर योद्धाओं, ऐतिहासिक प्रसंगों और मेवाड़ की गौरवशाली परंपरा को मूर्तियों के माध्यम से जीवंत रूप दिया गया है।

प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर राज्यपाल ने महाराणा प्रताप की हाथी पर सवार भव्य प्रतिमा सहित हल्दीघाटी युद्ध से संबंधित विभिन्न कलाकृतियों का अवलोकन किया और कलाकारों के प्रयासों की सराहना की।

“महान इतिहास हमेशा प्रेरणा देता है”

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की शक्ति उसके गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत में निहित होती है। उन्होंने कहा कि हल्दीघाटी का युद्ध केवल एक संघर्ष नहीं बल्कि स्वाभिमान, स्वतंत्रता और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। महान इतिहास आने वाली पीढ़ियों को ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि मेवाड़ की धरती वीरता और त्याग की भूमि रही है, जिसने कभी भी विदेशी सत्ता के सामने आत्मसमर्पण नहीं किया। महाराणा प्रताप, बप्पा रावल और अन्य वीर योद्धाओं का पराक्रम भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर है।

मेवाड़ की गौरवगाथा को दर्शाती हैं कलाकृतियां

प्रदर्शनी में महाराणा प्रताप, चेतक, हल्दीघाटी युद्ध के योद्धाओं और मेवाड़ के शौर्यपूर्ण इतिहास को दर्शाने वाली कलाकृतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। राज्यपाल ने कहा कि ऐसी प्रदर्शनियां नई पीढ़ी को अपने इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनती हैं।

देश-विदेश में स्थापित हो चुकी हैं 100 से अधिक प्रतिमाएं

मूर्तिकार महावीर भारती ने बताया कि उनके द्वारा निर्मित महाराणा प्रताप की 100 से अधिक प्रतिमाएं देश और विदेश में स्थापित की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शनी का उद्देश्य लोगों को महाराणा प्रताप के संघर्ष, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति से परिचित कराना है।

कार्यक्रम में नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा, राजस्थान वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी, विधायक गोपाल शर्मा सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इससे पूर्व राज्यपाल ने महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि भी दी।

इतिहास से जुड़ाव का संदेश

प्रदर्शनी के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि राष्ट्र की युवा पीढ़ी को अपने इतिहास, संस्कृति और वीरों के संघर्षों से परिचित कराना आवश्यक है। महाराणा प्रताप का जीवन साहस, आत्मसम्मान और राष्ट्रप्रेम की ऐसी मिसाल है जो सदियों बाद भी लोगों को प्रेरित करती है।

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