राजस्थान। आज पूरे देशभर में करवा चौथ का पावन व्रत धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस बार यह व्रत शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2025 को रखा जा रहा है। सुहागिन महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखकर अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना करती हैं।
क्यों मनाया जाता है करवा चौथ व्रत
करवा चौथ का व्रत पौराणिक काल से चली आ रही परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन माता पार्वती ने भगवान शिव से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति की थी, इसी कारण से सुहागिन महिलाएं माता पार्वती की पूजा करती हैं और अपने पति की दीर्घायु का आशीर्वाद मांगती हैं।
कहा जाता है कि महाभारत काल में द्रौपदी ने भी अर्जुन की सुरक्षा के लिए करवा चौथ का व्रत रखा था।
करवा चौथ की पूजा विधि
- महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत (बिना पानी के) रखती हैं।
- दोपहर को करवा चौथ की कथा सुनती हैं और करवा (मिट्टी का पात्र) में जल भरकर पूजा करती हैं।
- रात को चांद निकलने पर छलनी से चांद और पति को देखकर अर्घ्य देती हैं, फिर पति के हाथ से जल ग्रहण कर व्रत खोलती हैं।
करवा चौथ व्रत का महत्व
यह व्रत सिर्फ पति की लंबी उम्र के लिए ही नहीं बल्कि वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और सौभाग्य बनाए रखने का प्रतीक है।
ज्योतिष के अनुसार, करवा चौथ के दिन व्रत रखने और माता गौरी-शंकर की पूजा करने से दांपत्य जीवन में अटूट प्रेम और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
ऐसा माना जाता है कि यह व्रत स्त्री की आस्था, संयम और समर्पण का प्रतीक है।
करवा चौथ की कथा
एक बार की बात है, वीरवती नामक स्त्री ने करवा चौथ का व्रत रखा। भूख-प्यास से व्याकुल होने पर भाइयों ने छल से चांद जैसा दीपक दिखाया, जिससे उसने व्रत तोड़ दिया। कुछ ही समय बाद उसके पति की मृत्यु हो गई। अपनी गलती जानकर वीरवती ने माता पार्वती से क्षमा मांगी और पुनः कठोर तपस्या की। उसकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर माता ने उसके पति को पुनः जीवन दिया।
तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य का प्रतीक बन गया।
चंद्र दर्शन का शुभ मुहूर्त (2025)
चंद्र उदय का समय: रात 8:11 बजे (अलवर, जयपुर समयानुसार)
