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राजस्थान अध्ययन दल ने किया डेनमार्क के डैनिश फूड एंड एग्रीकल्चर काउंसिल के हेड ऑफिस का किया भ्रमण

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NCR SANDESH /जयपुर, 13 अक्टूबर। राजस्थान के कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र के विकास के लिए डेनमार्क की उन्नत तकनीकों और प्रगतिशील कृषि मॉडल का अध्ययन करने पहुंचे राजस्थान अध्ययन दल ने सोमवार को जोराराम कुमावत की अध्यक्षता में डेनमार्क स्थित डेनिश फूड एंड एग्रीकल्चर काउंसिल के हेड ऑफिस का भ्रमण किया। इस अवसर पर कुमावत ने कहा कि डेनमार्क विश्व स्तर पर डेयरी, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में अग्रणी है। वहां की तकनीकी व्यवस्था, किसान संगठनों की भूमिका तथा सहकारी मॉडल राजस्थान के लिए प्रेरणादायक हैं।
इस अवसर पर दल के सदस्यों ने प्राकृतिक खेती, जैविक उत्पादन, निर्यात प्रोत्साहन, मवेषी और मुर्गी चारा, तकनीकी सहयोग में सहभागिता आदि विषयों पर काउंसिल के सदस्यों के साथ विचार साझा किए तथा डेनिश फूड एंड एग्रीकल्चर काउंसिल के अधिकारियों ने राजस्थान प्रतिनिधिमंडल को डेनमार्क में अपनाए जा रहे टिकाऊ कृषि, दुग्ध उत्पादन, जैविक खेती, पशु कल्याण तथा खाद्य सुरक्षा के नवाचारों की जानकारी दी। दल के सदस्यों ने दोनों पक्षों के बीच तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और निवेश के अवसरों पर भी चर्चा की।
राज्य के पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने बताया कि राजस्थान अपनी देसी नस्लों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए काम कर रहा है और इस क्रम में डेनमार्क की कंपनी वेकिंग जेनेटिक्स के साथ मिलकर काम करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
पशुपालन राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा इस अध्ययन दौरे का उद्देश्य राजस्थान के किसानों और पशुपालकों के हित में आधुनिक तकनीक व प्रबंधन प्रणाली को अपनाना है ताकि राज्य में कृषि व पशुपालन की उत्पादकता और गुणवत्ता में वृद्धि हो सके।
पशुपालन सचिव डॉ. समित शर्मा ने राजस्थान में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए जाने के लिए डेनमार्क की एजेंसी और कंपनियों के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई।
इस अवसर पर डेनिश फूड एंड एग्रीकल्चर काउंसिल डेनमार्क के सीनियर एडवाइजर मैथ्यूज ने बताया कि वे लोग करीब 400 डेनिश कंपनियों के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं तथा इनमें से काफी कंपनियां राजस्थान के साथ मिलकर काम करना चाहती हैं।
भारतीय डेलिगेशन को बताया गया कि डेनमार्क का भारत सरकार के साथ पशुपालन क्षेत्र में सहयोग हेतु एक मेमोरेंडम आफ अंडरस्टैंडिंग भी हुआ है जिसके तहत भी राजस्थान में पशुपालन विकास हेतु कार्य किया जा सकता है
भ्रमण के दौरान दल के सदस्यों ने विभिन्न विभागों का निरीक्षण किया और स्थानीय विशेषज्ञों से विस्तृत चर्चा की।
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