नई दिल्ली | 16 अप्रैल 2026
नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को लोकसभा में अहम संबोधन देते हुए नारी शक्ति को सशक्त बनाने को देश के लिए ऐतिहासिक अवसर बताया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बेहद जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की आधी आबादी को नीति निर्धारण में शामिल करना समय की मांग है और यह किसी प्रकार का उपकार नहीं, बल्कि महिलाओं का अधिकार है। उन्होंने सांसदों से अपील की कि इस विषय को राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित में देखा जाए।
उन्होंने कहा कि आज देश एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है, जहां महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में अधिक प्रतिनिधित्व देने का अवसर मिला है। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह विचार वर्षों पहले लागू होना चाहिए था, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाने का सही समय है।
पीएम मोदी ने कहा कि पंचायत स्तर पर पहले ही महिलाओं को 50 प्रतिशत तक आरक्षण मिल चुका है और वहां से उभरी लाखों महिला नेता अब बड़े स्तर पर नेतृत्व के लिए तैयार हैं। उन्होंने बताया कि देशभर में हजारों महिलाएं जिला पंचायत, ब्लॉक और शहरी निकायों में सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रही हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी केवल संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि महिलाओं की निर्णय क्षमता और अनुभव देश के विकास को नई दिशा देंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित व्यवस्था किसी भी राज्य या क्षेत्र के साथ भेदभाव नहीं करेगी और परिसीमन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष होगी।
पीएम मोदी ने सांसदों से अपील की कि वे इस ऐतिहासिक मौके को हाथ से न जाने दें और सर्वसम्मति से इस दिशा में कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि देश की नारी शक्ति किसी भी तरह की देरी या नीयत में कमी को स्वीकार नहीं करेगी।
अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि जब संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, तो देश की विकास यात्रा और तेज होगी और लोकतंत्र और मजबूत बनेगा।
