नई दिल्ली | 15 अप्रैल 2026
देशभर में टोल सिस्टम को और ज्यादा पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने बड़ा कदम उठाया है। एनएचएआई ने सभी फास्टैग जारी करने वाले बैंकों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने द्वारा जारी किए गए फास्टैग से जुड़े वाहन पंजीकरण नंबर (VRN) का तुरंत सत्यापन करें।
यह फैसला उन शिकायतों के बाद लिया गया है, जिनमें पाया गया कि फास्टैग सिस्टम में दर्ज वाहन नंबर कई बार असली नंबर प्लेट से मेल नहीं खाते। इस तरह की गड़बड़ी से न सिर्फ टोल वसूली में समस्या आती है, बल्कि सरकारी राजस्व को भी नुकसान हो सकता है।
एनएचएआई के अनुसार, इस प्रकार की विसंगतियां खासकर उन फास्टैग में ज्यादा पाई गई हैं, जो पुराने समय में जारी किए गए थे, जब वाहन डेटाबेस से उनका सीधा लिंक नहीं था और मैन्युअल प्रक्रिया ज्यादा इस्तेमाल होती थी।
अब नए निर्देशों के तहत सभी बैंकों को अपने फास्टैग डेटा को अपडेट करना होगा। अगर किसी फास्टैग में गलत या अमान्य वाहन नंबर पाया जाता है, तो उसे तुरंत ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा।
एनएचएआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में लागू होने वाली मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम के लिए यह कदम बेहद जरूरी है। इस नई तकनीक में बिना रुके टोल वसूली होगी और नियम तोड़ने वाले वाहनों को ई-नोटिस भेजे जाएंगे, जो पूरी तरह सटीक डेटा पर निर्भर करेगा।
एनएचएआई का कहना है कि इस पहल से टोल सिस्टम की विश्वसनीयता बढ़ेगी, फास्टैग के दुरुपयोग पर रोक लगेगी और राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले लोगों को बेहतर अनुभव मिलेगा।
