आज देशभर में मनाई जा रही डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती, जानिए उनका जीवन, शिक्षा और योगदान
दिल्ली/जयपुर, 14 अप्रैल 2026:
आज पूरे देश में अंबेडकर जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है। इस दिन भारत के महान समाज सुधारक, न्यायविद और भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ. भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि दी जाती है। उनका जीवन संघर्ष, शिक्षा और समानता के लिए लड़ाई की मिसाल है।
जन्म और प्रारंभिक जीवन
डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मऊ (अब डॉ. अंबेडकर नगर) में हुआ था। उनके पिता रामजी मालोजी सकपाल ब्रिटिश भारतीय सेना में सूबेदार थे। दलित परिवार में जन्म लेने के कारण अंबेडकर को बचपन से ही भेदभाव और कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
शिक्षा: कठिनाइयों के बावजूद ऊंची उड़ान
अंबेडकर बचपन से ही पढ़ाई में बेहद तेज थे।
उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की।
इसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए और कोलंबिया विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पीएचडी की।
फिर उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से भी डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।
इतनी कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने दुनिया की श्रेष्ठ संस्थाओं से शिक्षा हासिल कर इतिहास रच दिया।
संविधान निर्माता कैसे बने
स्वतंत्रता के बाद भारत को एक मजबूत और न्यायपूर्ण संविधान की जरूरत थी।
डॉ. भीमराव अंबेडकर को उनकी विद्वता और कानून की गहरी समझ के कारण संविधान मसौदा समिति का अध्यक्ष बनाया गया।
उन्होंने समानता, स्वतंत्रता और न्याय के सिद्धांतों को आधार बनाया
समाज के हर वर्ग को अधिकार दिलाने पर जोर दिया
दलितों, महिलाओं और कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए
इसी वजह से उन्हें “संविधान का निर्माता” कहा जाता है।
सामाजिक योगदान और संघर्ष
अंबेडकर ने जीवनभर छुआछूत और जातिगत भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई।
उन्होंने दलितों के अधिकारों के लिए कई आंदोलन किए
शिक्षा और समानता को समाज सुधार का सबसे बड़ा हथियार बताया
उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए
मृत्यु और विरासत
6 दिसंबर 1956 को दिल्ली में उनका निधन हुआ। आज भी उनके विचार करोड़ों लोगों को प्रेरित करते हैं।
देशभर में आयोजन
आज अंबेडकर जयंती के मौके पर देशभर में रैलियां, संगोष्ठियां और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। लोग उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प ले रहे हैं।
डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन हमें सिखाता है कि कठिनाइयों के बावजूद शिक्षा और संघर्ष के दम पर बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। उनका योगदान भारत के इतिहास में हमेशा अमर रहेगा।
