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राजस्थान पुलिस स्थापना दिवस: DGP ने 3 हीरोज’ को किया सम्मानित, निस्वार्थ सेवा से बदल दी हजारों जिंदगियां

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जयपुर, 17 अप्रैल 2026। राजस्थान पुलिस के 77वें स्थापना दिवस के अवसर पर समाज के उन ‘अनसंग हीरोज’ को सम्मानित किया गया, जिन्होंने निस्वार्थ सेवा और साहस से हजारों लोगों की जिंदगी में बदलाव लाया। इस अवसर पर महानिदेशक पुलिस राजीव शर्मा ने तीन समाजसेवियों को राज्य स्तरीय प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

सम्मानित होने वालों में सिरोही के प्रकाश प्रजापति, झालावाड़ के सुजीत कश्यप (राम कश्यप) और उदयपुर की सिंधु बिनुजीत शामिल हैं। इन तीनों ने अलग-अलग क्षेत्रों में मानवता की सेवा कर पुलिस और समाज के बीच सहयोग की मिसाल पेश की है।

डीजीपी राजीव शर्मा ने कहा कि सच्ची सेवा वर्दी की मोहताज नहीं होती। यदि इरादा नेक हो, तो कोई भी व्यक्ति समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उन्होंने कहा कि पुलिस और आमजन के बीच मजबूत साझेदारी ही सुरक्षित और संवेदनशील समाज की नींव है।

इनके कार्यों को मिला सम्मान

प्रकाश प्रजापति (सिरोही) – 27 साल से मानव सेवा का संकल्प
प्रकाश प्रजापति पिछले 27 वर्षों से लावारिस और दुर्घटना में मृत लोगों के अंतिम संस्कार का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने अब तक 1584 शवों को निःशुल्क गंतव्य तक पहुंचाकर विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया।
कोरोना काल में, जब लोग अपने परिजनों से दूरी बना रहे थे, तब उन्होंने 360 कोविड संक्रमित शवों का अंतिम संस्कार कर मानवता की मिसाल पेश की। साथ ही स्वयं देहदान की घोषणा कर 19 अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित किया।

सुजीत कश्यप उर्फ राम कश्यप (झालावाड़) – संकट में बने ‘देवदूत’
राम कश्यप ने कई मौकों पर लोगों की जान बचाकर समाज में अलग पहचान बनाई। दिसंबर 2025 में उन्होंने झाड़ियों में छोड़े गए नवजात को बचाकर अस्पताल पहुंचाया और उसे कानूनी सुरक्षा दिलाई।
सड़क हादसों, मेलों में दुर्घटनाओं और गंभीर मरीजों की मदद में वे हमेशा आगे रहे। 2022 की बाढ़ में अपनी जान जोखिम में डालकर 15-20 परिवारों को सुरक्षित बाहर निकाला।

सिंधु बिनुजीत (उदयपुर) – बच्चों की सुरक्षा की मिसाल
बाल सुरक्षा सलाहकार सिंधु बिनुजीत ने बाल संरक्षण और स्मार्ट पुलिसिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। ‘बाल मित्र थाना’ और ‘सुरक्षित विद्यालय’ जैसी पहल से उन्होंने बच्चों और पुलिस के बीच भरोसा मजबूत किया।
यूनिसेफ के सहयोग से उन्होंने बाल श्रम और पलायन रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसकी सराहना राज्य स्तर पर की जा चुकी है।

इस अवसर पर डीजीपी ने कहा कि ऐसे लोग समाज के लिए प्रेरणा हैं और इनके कार्यों से यह साबित होता है कि सेवा की भावना ही सबसे बड़ी पहचान है।


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