नई दिल्ली, 04 AUGUST 2026। भारत ने आर्द्रभूमि (वेटलैंड) संरक्षण के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अरुणाचल प्रदेश की ग्लाव झील (Glow Lake) को देश की 101वीं रामसर साइट (Ramsar Site) घोषित किया गया है। इसके साथ ही अरुणाचल प्रदेश को अपना पहला रामसर स्थल भी मिल गया है।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि की घोषणा करते हुए कहा कि यह भारत की जैव विविधता संरक्षण, जल एवं जलवायु सुरक्षा तथा सतत विकास के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
2014 में थीं 26 रामसर साइट, अब हुईं 101
भूपेंद्र यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने रामसर स्थलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की है। वर्ष 2014 में देश में केवल 26 रामसर स्थल थे, जो अब बढ़कर 101 हो गए हैं। उन्होंने कहा कि हर नया रामसर स्थल पर्यावरण संरक्षण और इन पारिस्थितिक तंत्रों पर निर्भर समुदायों की आजीविका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कमलांग टाइगर रिजर्व में स्थित है ग्लाव झील
ग्लाव झील कमलांग टाइगर रिजर्व एवं वन्यजीव अभयारण्य के अंतर्गत स्थित पूर्वी हिमालय की एक स्वच्छ मीठे पानी की झील है। यह झील बारहमासी पहाड़ी जलधाराओं से पोषित होती है और चारों ओर घने जंगलों से घिरी हुई है।
इस क्षेत्र में 150 से अधिक वृक्ष प्रजातियां तथा 49 ऑर्किड प्रजातियां पाई जाती हैं, जो इसे जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र बनाती हैं।
क्या है रामसर साइट?
रामसर साइट ऐसे अंतरराष्ट्रीय महत्व के आर्द्रभूमि (Wetland) क्षेत्र होते हैं, जिन्हें रामसर कन्वेंशन के तहत संरक्षण के लिए मान्यता दी जाती है। इनका उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण, जल संसाधनों की सुरक्षा और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना है।
ग्लाव झील के शामिल होने के साथ भारत ने आर्द्रभूमि संरक्षण के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि अपने नाम कर ली है।
