नई दिल्ली, 17 अप्रैल 2026
देश की राजनीति में इन दिनों “परिसीमन” यानी Delimitation का मुद्दा तेजी से चर्चा में है। संसद में चल रही बहस और नेताओं के बयानों के कारण यह विषय आम लोगों के बीच भी जिज्ञासा का केंद्र बन गया है।

क्या होता है परिसीमन?
परिसीमन का मतलब होता है चुनावी क्षेत्रों यानी लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं को फिर से तय करना। यह प्रक्रिया जनसंख्या के आधार पर की जाती है, ताकि हर क्षेत्र में लगभग समान संख्या में मतदाता हों और प्रतिनिधित्व संतुलित बना रहे।
यह काम परिसीमन आयोग द्वारा किया जाता है, जिसे केंद्र सरकार बनाती है।
क्यों जरूरी होता है परिसीमन?
समय के साथ आबादी बढ़ती और बदलती रहती है। ऐसे में कुछ क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या ज्यादा हो जाती है, जबकि कुछ जगह कम। इस असंतुलन को ठीक करने के लिए परिसीमन किया जाता है, ताकि हर वोट की कीमत बराबर बनी रहे।
अभी क्यों हो रही है बहस?
दरअसल, केंद्र सरकार महिला आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया को परिसीमन से जोड़ रही है। इसी वजह से संसद में इस पर जोरदार बहस हो रही है।
सत्ता पक्ष का कहना है कि परिसीमन से लोकतंत्र और मजबूत होगा, जबकि विपक्ष को डर है कि इससे कुछ राज्यों की सीटें कम-ज्यादा हो सकती हैं और राजनीतिक संतुलन बदल सकता है।
दक्षिण बनाम उत्तर की चिंता
बहस का एक बड़ा कारण यह भी है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण बेहतर किया है (जैसे दक्षिण भारत के राज्य), उन्हें डर है कि परिसीमन के बाद उनकी सीटें कम हो सकती हैं, जबकि ज्यादा आबादी वाले राज्यों (जैसे उत्तर भारत) की सीटें बढ़ सकती हैं।
अभी क्या स्थिति है?
भारत में आखिरी बार परिसीमन 2002 में हुआ था, लेकिन 1971 की जनगणना के आधार पर सीटों की संख्या तय की गई थी। फिलहाल 2026 के बाद नए परिसीमन की संभावना जताई जा रही है, जिससे यह मुद्दा फिर गर्म हो गया है।
