जयपुर, 31 मार्च 2026। राजस्थान सरकार तीर्थराज पुष्कर को विश्वस्तरीय धार्मिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पुष्कर के समग्र विकास की कार्ययोजना को लेकर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में कहा कि पौराणिक विरासत को संरक्षित रखते हुए पुष्कर को नया स्वरूप दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री सोमवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे।
पौराणिक विरासत के संरक्षण के साथ होगा विकास
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुष्कर का विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व है और राज्य सरकार इसकी ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार करेगी। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों से आने वाली पीढ़ियों का संस्कृति से जुड़ाव मजबूत होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।
घाटों और मंदिरों का होगा सौंदर्यकरण
बैठक में निम्न विकास कार्यों पर विस्तार से चर्चा की गई—
- पुष्कर सरोवर के घाटों पर सुविधाओं का विस्तार
- ब्रह्मा मंदिर सहित प्रमुख मंदिरों का सौंदर्यकरण
- परिक्रमा मार्गों का विकास
- भव्य एंट्री प्लाजा का निर्माण
- सड़क एवं आधारभूत ढांचे का सुधार
मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
साधु-महंतों और स्थानीय नागरिकों से लिए सुझाव
बैठक में पुष्कर से आए साधु-महंतों एवं स्थानीय नागरिकों ने विकास कार्यों को लेकर अपने सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने जनसहभागिता को विकास की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि आमजन के सहयोग से योजनाएं अधिक प्रभावी बनेंगी।
इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने साधु-महंतों का दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मान भी किया।
बैठक में ये रहे मौजूद
बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत, राजस्थान धरोहर प्राधिकरण अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित वरिष्ठ अधिकारी एवं पुष्कर से आए प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
सरकार का मानना है कि पुष्कर के विकास से धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिलेगी, श्रद्धालुओं की सुविधाएं बढ़ेंगी और स्थानीय व्यापार एवं रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।
