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मौसम पूर्वानुमानों की सटीकता में बड़ा सुधार, 2025 का मानसून अनुमान रहा अत्यधिक सटीक: लोकसभा में सरकार की जानकारी

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नई दिल्ली, 11 FEB । वर्ष 2025 के दौरान देश में मौसम पूर्वानुमानों की सटीकता, प्रारंभिक चेतावनियों के प्रसार और जलवायु सेवाओं के वितरण में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। यह जानकारी पृथ्वी विज्ञान और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 11 फरवरी 2026 को लोकसभा में एक संसदीय प्रश्न के उत्तर में दी।

मंत्री ने बताया कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा वर्ष 2025 के दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए जारी पूर्वानुमान अत्यधिक सटीक रहा। अप्रैल 2025 में जारी किए गए दीर्घकालिक पूर्वानुमान में देशभर में वर्षा दीर्घकालिक औसत (LPA) के 105% रहने का अनुमान लगाया गया था, जिसमें मॉडल त्रुटि ±5% थी। वहीं मई 2025 के अंत में जारी अद्यतन पूर्वानुमान में वर्षा LPA के 106% रहने का आकलन किया गया, जिसमें मॉडल त्रुटि ±4% रही। वास्तविक मौसमी वर्षा LPA के 108% दर्ज की गई।

सरकार ने बताया कि देश के अधिकांश क्षेत्रों में स्थानिक संभाव्यता पूर्वानुमान और मासिक वर्षा पूर्वानुमान भी प्रेक्षित मूल्यों के काफी अनुरूप रहे और निर्धारित सीमाओं के भीतर रहे।

चेतावनी प्रसार में डिजिटल प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग

जलवायु संबंधी प्रारंभिक चेतावनियों और सेवाओं के वितरण के लिए IMD द्वारा कई डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। इनमें कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP), API, वेबसाइट, मोबाइल ऐप और सोशल मीडिया शामिल हैं। हाल ही में आए चक्रवात “मोनथा” के दौरान जनता को 77.64 करोड़ SMS के माध्यम से चेतावनियां भेजी गईं। इसके साथ ही सभी वास्तविक समय के आंकड़े, पूर्वानुमान और चेतावनियां समय पर राज्य आपातकालीन संचालन केंद्रों के साथ साझा की गईं।

दिल्ली में पूर्वानुमान की सटीकता

वर्ष 2025 के दौरान दिल्ली में मौसम संबंधी पूर्वानुमानों की सटीकता इस प्रकार रही—

  • वर्षा: 93%

  • अधिकतम तापमान: 84%

  • न्यूनतम तापमान: 68%

  • घने कोहरे की घटनाएं: 75%

मौसम एवं जलवायु पूर्वानुमान प्रणाली को मजबूत करने के प्रयास

सरकार ने बताया कि देश में मौसम और जलवायु पूर्वानुमान प्रणालियों को मजबूत करने के लिए लगातार नई तकनीकों को अपनाया जा रहा है। इसके तहत—

  • अतिरिक्त AWS, ARG और DWR की स्थापना

  • डेटा एकीकरण में सुधार और GIS आधारित DSS का विकास

  • संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान (NWP) और जलवायु मॉडलों का उन्नयन

  • जिला एवं उप-शहर स्तर तक प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान (IBF) और जोखिम-आधारित चेतावनी (RBW) प्रणाली का कार्यान्वयन

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग (ML) का उपयोग

  • बुलेटिन और चेतावनियों का कस्टमाइजेशन

  • उच्च क्षमता कंप्यूटिंग संसाधनों में वृद्धि, जिसमें ‘अर्का’ और ‘अरुणिका’ सुपरकंप्यूटर का उपयोग

  • पंचायत मौसम सेवा और अत्याधुनिक सूचना प्रसार प्रणाली का विकास

‘मिशन मौसम’ की शुरुआत

हाल ही में भारत को “मौसम के लिए तैयार और जलवायु-स्मार्ट राष्ट्र” बनाने के उद्देश्य से ‘मिशन मौसम’ नामक एक नई केंद्रीय क्षेत्र योजना शुरू की गई है, जिसमें IMD एक प्रमुख भागीदार है।

सरकार के अनुसार, इन प्रयासों से देश में मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन क्षमता को और अधिक मजबूत किया जा रहा है, जिससे जान-माल के नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी।

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