अयोध्या में राष्ट्रपति का आध्यात्मिक दौरा, नवरात्रि के पहले दिन किया विशेष पूजन
अयोध्या, 19 मार्च। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर पहुंचकर रामलला के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने मंदिर परिसर में विभिन्न स्थानों पर आरती में भाग लिया तथा श्री राम यंत्र की स्थापना एवं पूजन भी किया।
नवरात्रि के प्रथम दिन और चैत्र शुक्ल संवत्सर 2083 के शुभ अवसर पर अयोध्या पहुंचना राष्ट्रपति ने अपना सौभाग्य बताया।
अयोध्या की पवित्र धरा को बताया सौभाग्य
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि अयोध्या की पवित्र धूलि का स्पर्श करना उनके लिए अत्यंत गौरव और सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि यही वह पावन नगरी है जहां प्रभु श्रीराम का जन्म हुआ और जिसकी आध्यात्मिक परंपरा पूरे देश को प्रेरित करती है।
राम राज्य के आदर्शों पर आधारित राष्ट्र निर्माण का संदेश
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि श्री राम यंत्र स्थापना का उद्देश्य राम राज्य के आदर्शों को आत्मसात करना है। उन्होंने कहा कि नैतिकता, धर्माचरण और सामाजिक समरसता के आधार पर ही विकसित राष्ट्र का निर्माण संभव है।
उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास के राम राज्य का उल्लेख करते हुए कहा कि राम राज्य में कोई दुखी, निर्धन या असहाय नहीं होता और समाज समानता एवं न्याय के सिद्धांतों पर चलता है।
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को प्राप्त करेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सामाजिक समावेश और आर्थिक न्याय को केंद्र में रखकर राष्ट्रीय विकास की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
एकता और राष्ट्र निर्माण का आह्वान
अपने संदेश में राष्ट्रपति ने नागरिकों से एकता और भाईचारे की भावना के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम की भक्ति हमें जोड़ती है और यही भावना भारत के पुनर्जागरण की शक्ति बनेगी।
