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लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला की बड़ी पहल: 60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूह गठित, वैश्विक लोकतांत्रिक रिश्तों को मिलेगी मजबूती

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नई दिल्ली, 23 फरवरी 2026।
विश्व के देशों के साथ भारत के संसदीय संबंधों को और अधिक मजबूत करने की दिशा में लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों का गठन किया है। इस कदम को भारत की संसदीय कूटनीति (Parliamentary Diplomacy) को नई मजबूती देने वाला माना जा रहा है।

लोक सभा अध्यक्ष की इस पहल का उद्देश्य भारत की संसद और अन्य देशों की संसदों के बीच प्रत्यक्ष, नियमित और संस्थागत संवाद को बढ़ावा देना है, ताकि पारंपरिक कूटनीति के साथ-साथ संसदीय स्तर पर भी आपसी समझ और विश्वास मजबूत हो सके।

दलीय राजनीति से ऊपर, सभी दलों की भागीदारी

इन संसदीय मैत्री समूहों में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसदों को शामिल किया गया है, जो भारत के लोकतंत्र की विविधता और समावेशी चरित्र को दर्शाता है। वरिष्ठ नेताओं को विभिन्न देशों के मैत्री समूहों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे अंतर-संसदीय रिश्तों को मजबूती मिलेगी।

इस पहल में यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि राष्ट्रहित और वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका दलीय राजनीति से ऊपर है।

60 से अधिक देशों के साथ मैत्री समूह

जिन देशों और क्षेत्रों के साथ संसदीय मैत्री समूह बनाए गए हैं, उनमें अमेरिका, रूस, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, इज़राइल, यूरोपीय संसद, नेपाल, श्रीलंका, भूटान, दक्षिण अफ्रीका, ब्राज़ील, सिंगापुर, वियतनाम, ईरान और मालदीव सहित कई प्रमुख देश शामिल हैं।

इन समूहों के माध्यम से व्यापार, तकनीक, सामाजिक नीतियों, संस्कृति और वैश्विक चुनौतियों जैसे विषयों पर सांसद आपस में संवाद करेंगे।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बहुदलीय एकजुटता को आगे बढ़ाया

यह पहल ऑपरेशन सिंदूर के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उस बहुदलीय सोच को आगे बढ़ाती है, जिसमें भारत का पक्ष वैश्विक मंच पर एकजुट होकर रखने पर जोर दिया गया था। लोक सभा अध्यक्ष द्वारा मैत्री समूहों को औपचारिक रूप देना उसी दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।

भारत की संसद बनेगी देशों के बीच सेतु

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लगातार यह रेखांकित किया है कि संसदीय कूटनीति भारत की वैश्विक पहचान को सशक्त बनाती है। नियमित संवाद, अध्ययन यात्राओं और संयुक्त बैठकों के माध्यम से ये मैत्री समूह दीर्घकालिक सहयोग को बढ़ावा देंगे और भारत की संसद को विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की प्रभावी आवाज के रूप में स्थापित करेंगे।

पहले चरण में 60 से अधिक देशों के साथ मैत्री समूह गठित किए गए हैं, जबकि आने वाले समय में अन्य देशों के साथ भी ऐसे समूहों के गठन की प्रक्रिया जारी रहेगी।

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