दिल्ली, 13 मार्च। आमतौर पर घरों में इस्तेमाल होने वाला गैस सिलेंडर लाल रंग का होता है, लेकिन क्या आपने कभी नीले, काले या सफेद रंग के सिलेंडर देखे हैं? दरअसल, गैस सिलेंडरों के अलग-अलग रंग महज दिखावे के लिए नहीं होते, बल्कि यह एक अंतरराष्ट्रीय सेफ्टी कोड (Gas Cylinder Color Code) का हिस्सा होते हैं।
इन रंगों की मदद से दूर से ही यह पहचान की जा सकती है कि सिलेंडर में कौन-सी गैस भरी हुई है और वह कितनी खतरनाक या उपयोगी हो सकती है। इसलिए सुरक्षा के लिहाज से इन रंगों की जानकारी होना बेहद जरूरी माना जाता है।
🔴 लाल रंग का सिलेंडर
लाल रंग का सिलेंडर आमतौर पर एलपीजी (LPG) गैस के लिए उपयोग किया जाता है, जो घरों में खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होती है। भारत में अधिकतर घरेलू सिलेंडर इसी रंग के होते हैं।
🔵 नीला रंग का सिलेंडर
नीले रंग के सिलेंडर में आमतौर पर नाइट्रस ऑक्साइड या कुछ विशेष औद्योगिक गैसें भरी जाती हैं। इसका इस्तेमाल अस्पतालों और इंडस्ट्री में किया जाता है।
⚫ काला या ग्रे सिलेंडर
काले या ग्रे रंग के सिलेंडर में अक्सर ऑक्सीजन या अन्य औद्योगिक गैसें रखी जाती हैं। इन्हें मेडिकल और औद्योगिक कार्यों में उपयोग किया जाता है।
⚪ सफेद रंग का सिलेंडर
सफेद सिलेंडर में विशेष प्रकार की गैसें जैसे हेलियम या अन्य मेडिकल गैसें भरी जाती हैं, जिनका उपयोग वैज्ञानिक और चिकित्सा क्षेत्रों में होता है।
सुरक्षा के लिए जरूरी पहचान
विशेषज्ञों के अनुसार गैस सिलेंडरों के रंगों की पहचान होना जरूरी है, क्योंकि इससे गैस के प्रकार और उससे जुड़े खतरे का अंदाजा लगाया जा सकता है। यही कारण है कि दुनिया भर में गैस सिलेंडरों के लिए रंगों का एक मानक कोड तय किया गया है।
