बारामती / महाराष्ट्र, 28 जनवरी 2026। महाराष्ट्र की राजनीति का एक सशक्त चेहरा रहे उपमुख्यमंत्री अजित पवार का जीवन और राजनीतिक सफर जिस धरती से शुरू हुआ, उसी बारामती में उनका आखिरी अध्याय भी जुड़ गया। यह वही बारामती है, जिसने उन्हें पहचान दी, सत्ता तक पहुंचाया और दशकों तक उनकी राजनीतिक ताकत का केंद्र बनी रही।
अजित पवार ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बारामती क्षेत्र से की थी। जनता से सीधे जुड़ाव, विकास कार्यों और संगठन क्षमता के बल पर उन्होंने इस क्षेत्र को अपना मजबूत गढ़ बनाया। लगातार चुनावी सफलताओं ने उन्हें राज्य की राजनीति में प्रभावशाली नेता के रूप में स्थापित किया।
विडंबना यह रही कि जिस बारामती ने उन्हें ऊंचाइयों तक पहुंचाया, वहीं से जुड़ी एक दुखद घटना ने उनके जीवन का अंत कर दिया। उनके आकस्मिक निधन की खबर सामने आते ही महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम जनता ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
अजित पवार को एक कुशल प्रशासक, सख्त निर्णय लेने वाले नेता और जमीनी राजनीति करने वाले व्यक्तित्व के रूप में याद किया जाएगा। बारामती के विकास में उनकी भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता। आज वही बारामती उनके संघर्ष, सफलता और विरासत की साक्षी बन गई है।
उनका जीवन इस बात का प्रतीक रहा कि सत्ता और संघर्ष एक ही जमीन से जन्म लेते हैं और कभी-कभी वहीं आकर थम भी जाते हैं।
