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अलवर में सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति पर विवाद, वन मंत्री संजय शर्मा निगम में धरने पर बैठे, बोले- कलेक्टर रहने लायक नहीं

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अलवर, 12 अगस्त । नगर निगम अलवर में वर्ष 2012 में हुई सफाई कर्मचारियों की भर्ती को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। नियुक्ति पत्र नहीं मिलने से नाराज सफाई कर्मचारियों के समर्थन में राजस्थान के वन मंत्री संजय शर्मा बुधवार सुबह नगर निगम पहुंचे और कर्मचारियों के साथ धरने पर बैठ गए। मंत्री ने जिला प्रशासन और नगर निगम आयुक्त की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जब सरकार और विभाग के स्तर से नियुक्ति को लेकर निर्देश हैं तो कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र क्यों नहीं दिए जा रहे हैं।

329 कर्मचारियों की नियुक्ति का मामला

वन मंत्री संजय शर्मा ने बताया कि वर्ष 2012 में सफाई कर्मचारियों की भर्ती हुई थी। उनके अनुसार 329 कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र नहीं दिए गए, जिसके बाद कर्मचारी हाईकोर्ट चले गए। मंत्री का कहना है कि हाईकोर्ट का फैसला कर्मचारियों के पक्ष में आने के बावजूद करीब सवा साल बीत जाने पर भी उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं मिल पाए हैं।

संजय शर्मा के मुताबिक इस मामले में लंबे समय से डीएलबी और नगर निगम के बीच पत्राचार चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले चार-पांच महीनों से तत्कालीन आयुक्त की ओर से शासन विभाग को सही स्थिति से अवगत नहीं कराया गया।

कलेक्टर के 69 पात्र कर्मचारियों के दावे पर सवाल

मंत्री ने बताया कि उन्होंने जिला कलेक्टर से इस मामले में बातचीत की। कलेक्टर की ओर से 69 कर्मचारियों को पात्र बताए जाने की बात कही। वहीं, मंत्री के अनुसार डीएलबी की ओर से 369 कर्मचारियों की नियुक्ति की बात कही जा रही है।

इसी अंतर को लेकर वन मंत्री ने कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पिछले करीब सात महीनों से उन्हें और संभवतः संबंधित शासन विभाग के मंत्री को भी इस मामले में गुमराह किया जा रहा है।

सरकार से बड़े हो गए कलेक्टर और आयुक्त?

धरने के दौरान वन मंत्री संजय शर्मा ने प्रशासन पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि सरकार के स्तर पर नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश हैं तो अधिकारियों को उसका पालन करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कलेक्टर और आयुक्त सरकार से बड़े हो गए हैं?

मंत्री ने कलेक्टर की कार्यशैली पर भी कड़ी टिप्पणी की और कहा कि यदि अधिकारी सरकार के निर्देशों के बावजूद काम नहीं कर रहे हैं तो ऐसे अधिकारी पद पर रहने लायक नहीं हैं।

वाल्मीकि समाज के समर्थन में उतरे मंत्री

संजय शर्मा ने सफाई कर्मचारियों के आंदोलन को वाल्मीकि समाज से जोड़ते हुए कहा कि वाल्मीकि समाज उनका अपना समाज है और वे समाज के सुख-दुख में हमेशा साथ खड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि समाज के लोगों के साथ कोई समस्या आती है तो वह उनके साथ खड़े रहेंगे।

मंत्री ने धरने के दौरान स्पष्ट किया कि जब तक सफाई कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र नहीं दिए जाते, तब तक वह धरने से नहीं उठेंगे।

वकीलों के भवन का मुद्दा भी उठाया

धरने के दौरान वन मंत्री ने अलवर में वकीलों के नए भवन से जुड़े मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में भी जिला प्रशासन की ओर से अड़चनें पैदा गई।

सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर मंत्री के धरने पर बैठने के बाद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तर पर गरमा गया है।

अब निगाहें प्रशासन और नगर निगम की अगली कार्रवाई पर हैं। कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र कब जारी होते हैं और सरकार इस पूरे मामले में क्या कदम उठाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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