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‘राज-ममता’ से बदलेगा राजस्थान का हेल्थ मॉडल: हर जिले में मानसिक स्वास्थ्य सेल, जयपुर बनेगा हब

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जयपुर, 21 अप्रैल। मानसिक स्वास्थ्य को लेकर अब राजस्थान नई दिशा में कदम बढ़ा रहा है। Bhajan Lal Sharma सरकार ने ‘राज-ममता’ कार्यक्रम के जरिए एक ऐसा मॉडल तैयार करने की पहल की है, जो न सिर्फ इलाज बल्कि मानसिक समस्याओं की समय रहते पहचान और रोकथाम पर भी फोकस करेगा।

यह योजना ‘विकसित राजस्थान-2047’ विजन का अहम हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें हर नागरिक तक मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

 गांव से शहर तक मानसिक स्वास्थ्य नेटवर्क

‘राज-ममता’ की सबसे बड़ी खासियत इसका डिस्ट्रिक्ट-लेवल नेटवर्क है:

  • हर जिले में ‘मेंटल हेल्थ केयर सेल’ स्थापित होंगे
  • स्थानीय स्तर पर काउंसलिंग, ट्रीटमेंट और फॉलोअप
  • ग्रामीण क्षेत्रों तक सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित

 इससे मरीजों को बड़े शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

 जयपुर में बनेगा हाईटेक मेंटल हेल्थ हब

Jaipur को इस मिशन का केंद्र बनाया जा रहा है, जहां
‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन मेंटल हेल्थ’ स्थापित होगा।

  • एडवांस काउंसलिंग और थेरेपी
  • टेली-मेडिसिन के जरिए विशेषज्ञों से सीधा संपर्क
  • रिसर्च और ट्रेनिंग फैसिलिटी

👉 यह सेंटर पूरे प्रदेश के लिए गाइडिंग हब की तरह काम करेगा।

 ‘टेली-मानस’ से मिल रहा त्वरित सहारा

मानसिक तनाव के मामलों में तुरंत मदद के लिए Tele-MANAS सेवा अहम भूमिका निभा रही है।

  • 71,000 से ज्यादा लोग ले चुके हैं परामर्श
  • 24×7 हेल्पलाइन: 14416, 18008914416
  • घर बैठे विशेषज्ञ सलाह उपलब्ध

 युवाओं और छात्रों पर खास नजर

नई योजना में युवाओं को केंद्र में रखा गया है:

  • स्कूल और कॉलेजों में काउंसलिंग कैंप
  • आत्महत्या रोकथाम पर जागरूकता
  • आशा कार्यकर्ताओं और हेल्थ मित्रों की ट्रेनिंग

👉 लक्ष्य है कि समस्या शुरुआती स्तर पर ही पकड़ में आ जाए।

 क्यों अहम है ‘राज-ममता’?

  • डिप्रेशन और एंग्जायटी के बढ़ते मामले
  • मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की कमी
  • ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाओं की कमी

👉 यह योजना इन सभी चुनौतियों को एक साथ टारगेट करती है।

 क्या बनेगा नया बदलाव?

‘राज-ममता’ लागू होने के बाद:

  • मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं आम लोगों तक पहुंचेंगी
  • इलाज में देरी कम होगी
  • समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सोच बदलेगी

राजस्थान का ‘राज-ममता’ कार्यक्रम सिर्फ हेल्थ स्कीम नहीं, बल्कि एक सामाजिक बदलाव की शुरुआत है। अगर इसका क्रियान्वयन मजबूत रहा, तो राज्य मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश के लिए उदाहरण बन सकता है।

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