अलवर, 21 अप्रैल। राजस्थान के अलवर शहर में नागरिक सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से Babu Shobharam Government Arts College परिसर में एयर स्ट्राइक (हवाई हमले) की स्थिति से निपटने के लिए व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस अभ्यास में प्रशासन, पुलिस, चिकित्सा और आपदा राहत एजेंसियों ने मिलकर आपातकालीन हालात से निपटने की तैयारी को परखा।

सायरन बजते ही शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन
शाम करीब 6:30 बजे कंट्रोल रूम से हवाई हमले की सूचना प्रसारित की गई और सायरन बजाकर अलर्ट जारी किया गया।
- सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन, फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस और सिविल डिफेंस की टीमें मौके पर पहुंचीं
- कॉलेज परिसर को खाली कराया गया
- आग बुझाने और घायलों को निकालने का त्वरित अभ्यास किया गया।
घायलों का रेस्क्यू और मेडिकल मैनेजमेंट
मॉक ड्रिल के दौरान घायलों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर इलाज की प्रक्रिया अपनाई गई।
- गंभीर घायलों को तुरंत अस्पताल भेजा गया
- मौके पर फर्स्ट एड और मेडिकल चेकअप किया गया
- एम्बुलेंस नेटवर्क और रिस्पॉन्स टाइम की भी जांच की गई।
आधुनिक फायर सिस्टम और उपकरणों का परीक्षण
नगर निगम की हाईटेक हाइड्रोलिक फायर मशीन का भी ट्रायल किया गया, जो ऊंची इमारतों में आग बुझाने में सक्षम है।
- फायर टीम ने आग पर काबू पाने की त्वरित कार्रवाई दिखाई
- रेस्क्यू उपकरणों की कार्यक्षमता को जांचा गया।
ड्रोन हमले से बचाव की रणनीति पर फोकस
इस अभ्यास में खासतौर पर ड्रोन हमले जैसी आधुनिक चुनौतियों से निपटने पर ध्यान दिया गया।
- चेतावनी प्रणाली (सायरन, रेडियो लिंक) का परीक्षण
- कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली की समीक्षा
- विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत किया गया।
ब्लैकआउट का पूर्वाभ्यास, नागरिकों ने निभाई अहम भूमिका
मॉक ड्रिल के बाद शाम 7:45 से 8 बजे तक सीमित क्षेत्र में ब्लैकआउट किया गया।
- कर्मचारी कॉलोनी, अशोक विहार और आसपास के क्षेत्रों में लाइट बंद रखी गई
- लोगों ने स्वेच्छा से घर, दुकान और वाहनों की लाइट बंद कर सहयोग किया
इस अभ्यास का उद्देश्य था कि किसी हमले की स्थिति में नागरिक खुद को सुरक्षित रखने के तरीके समझ सकें।
प्रशासनिक अधिकारियों ने लिया जायजा
इस दौरान जिला कलेक्टर Dr. Aartika Shukla सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे और पूरी व्यवस्था का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने रेस्क्यू टीमों के रिस्पॉन्स टाइम और कार्यशैली की सराहना की, साथ ही कमियों को सुधारने के निर्देश दिए।
क्यों जरूरी है ऐसी मॉक ड्रिल
- आपातकालीन स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना
- नागरिकों और प्रशासन के बीच तालमेल बढ़ाना
- नई तकनीकी चुनौतियों (जैसे ड्रोन अटैक) से निपटने की तैयारी।
अलवर में आयोजित यह मॉक ड्रिल सिर्फ एक अभ्यास नहीं, बल्कि भविष्य की संभावित आपात स्थितियों से निपटने की तैयारी का अहम कदम है। इसमें प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिकों की भागीदारी ने इसे और प्रभावी बना दिया।
