मनीष बावलिया/हेमंत गुप्ता /अलवर, 14 मार्च /
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुए उस दर्दनाक हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को पलभर में उजाड़ दिया। लेकिन इस दर्द के बीच जो दृश्य राजगढ़ थाने में दिखा, उसने हर किसी की आंखें नम कर दीं।
2 साल की मासूम रिद्धि… जिसे अभी ठीक से दुनिया भी समझ नहीं आई, वह “मां… मां…” कहते हुए लगातार रोती रही। उसकी सिसकियां पूरे थाने में गूंजती रहीं। वहां मौजूद हर पुलिसकर्मी का दिल पसीज गया।
राजगढ़ थानाधिकारी से लेकर सभी पुलिसकर्मियों ने बच्ची को संभालने की कोशिश की। महिला पुलिसकर्मियों ने उसे अपने सीने से लगाकर चुप कराने की कोशिश की, जैसे कोई मां अपने बच्चे को थामती है। लेकिन मासूम की पुकार थमने का नाम नहीं ले रही थी… वो बार-बार दरवाजे की ओर देखती और फिर रो पड़ती।
इस मंजर को देखकर सभी पुलिसकर्मियों की आंखें भी भर आईं। वर्दी के पीछे छिपा इंसान आज खुलकर सामने आ गया।
दरअसल, इस हादसे में रिद्धि ने अपने पिता मोनू यादव, मां रीना यादव और 8 साल की बहन डोली को हमेशा के लिए खो दिया। परिवार उज्जैन में महाकाल के दर्शन कर लौट रहा था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
पुलिस ने न सिर्फ कानूनी प्रक्रिया पूरी की, बल्कि इस नन्हीं बच्ची के लिए मां जैसा स्नेह भी दिखाया। हर कोई उसे बहलाने की कोशिश करता रहा, लेकिन उसकी एक ही पुकार थी—“मां…”
कुछ देर बाद जब परिजन पहुंचे और रिद्धि को अपने साथ ले गए, तब भी थाने में मौजूद लोग उस मासूम की सिसकियों को भूल नहीं पाए।
यह खबर सिर्फ एक हादसे की नहीं… बल्कि उस दर्द की है, जो शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता… और उस इंसानियत की, जो वर्दी के अंदर आज भी जिन्दा है।
