NCR SANDESH / अलवर। भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र में फैक्ट्री में लगी भीषण आग ने सात लोगों की जान ले ली, लेकिन इस हादसे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर खड़ा हो गया है। आखिर यह दुर्घटना सिर्फ एक हादसा थी या लापरवाही का परिणाम?
औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों की निगरानी और भूमि आवंटन की जिम्मेदारी RIICO (रीको) की होती है। ऐसे में सवाल उठता है कि संबंधित फैक्ट्री को किस उद्देश्य से भूखंड आवंटित किया गया था और वहां वास्तव में किस प्रकार की गतिविधियां संचालित हो रही थीं? क्या फैक्ट्री में केमिकल और पटाखा जैसी ज्वलनशील सामग्री के भंडारण और निर्माण की अनुमति थी? यदि नहीं, तो यह सब किसकी निगरानी में हो रहा था?
इसी प्रकार श्रम विभाग और फैक्ट्री निरीक्षण तंत्र की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। क्या नियमित निरीक्षण किए गए थे? क्या अग्नि सुरक्षा मानकों, श्रमिक सुरक्षा उपकरणों और वैधानिक अनुमतियों की समय-समय पर जांच हुई? यदि निरीक्षण होते और कमियों को समय रहते दूर कराया जाता, तो क्या इतनी बड़ी जनहानि टल सकती थी?
स्थानीय लोगों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्रों में कई इकाइयां निर्धारित मानकों से अलग कार्य करती हैं, लेकिन कार्रवाई अक्सर हादसे के बाद ही क्यों होती है। प्रशासन ने अब सात दिन में सभी इकाइयों की जांच के आदेश दिए हैं, पर सवाल यह है कि यह सख्ती पहले क्यों नहीं दिखाई गई?
यह हादसा केवल एक फैक्ट्री तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे औद्योगिक सुरक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। यदि संबंधित विभाग अपनी जिम्मेदारी समय पर निभाते, तो शायद आज सात परिवारों को अपनों को खोना नहीं पड़ता।
अब जरूरत है पारदर्शी जांच और जवाबदेही तय करने की, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा केवल कागजों तक सीमित न रहे।
