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न विजन, न नीति, न नीयत, भाजपा सरकार ने पेश किया ‘विश्वासघाती’ बजट: नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली

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जयपुर 11 FEB  ।नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने बुधवार को विधानसभा में पेश राज्य बजट पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे ‘खोखला’, ‘सतही’ और राजस्थान की प्रगति को रोकने वाला दस्तावेज़ करार दिया है। उन्होंने कहा कि जिस बजट की बुनियाद ही पिछले भाषणों की पुनरावृत्ति हो, वह प्रदेश का भविष्य नहीं संवार सकता।

विफलता के आंकड़े: कथनी और करनी का अंतर

जूली ने सदन के बाहर मीडिया से वार्ता में सरकार की कार्यप्रणाली की पोल खोलते हुए कहा कि पिछले दो बजटों की 2718 घोषणाओं में से केवल 900 (30% से भी कम) पूरी हुई हैं, जबकि 284 परियोजनाओं पर तो ईंट तक नहीं लगी। उन्होंने तंज कसा कि सरकार को 2026 की ज़मीनी हकीकत का पता नहीं, लेकिन जवाबदेही से बचने के लिए 2047 के हवाई सपने दिखा रही है।

नल कनेक्शन में 45 लाख का वादा, 14 लाख पर सिमटी सरकार

जल जीवन मिशन को सरकार की सबसे बड़ी विफलता बताते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा, “वित्त मंत्री ने पिछले दो वर्षों में 45 लाख नल कनेक्शन का वादा किया था, लेकिन सदन में खुद स्वीकार किया कि मात्र 14 लाख कनेक्शन दिए गए। यह प्रदेश की जनता के साथ सीधा विश्वासघात है।”

वित्तीय कुप्रबंधन और गिरती अर्थव्यवस्था

जूली ने सरकार को वित्तीय मोर्चे पर ‘फेल’ बताते हुए कहा:

राजस्व घाटा: बजट अनुमान ₹31,009 करोड़ से बढ़कर ₹32,982 करोड़ हो गया।

राजस्व प्राप्ति: अनुमान से ₹9,003 करोड़ की भारी कमी दर्ज की गई।

उन्होंने कहा कि सरकार अपनी नाकामियों का दोष दूसरों पर मढ़ रही है, जबकि हकीकत यह है कि- “उम्र भर ग़ालिब यही भूल करता रहा, धूल चेहरे पे थी आइना साफ़ करता रहा।”

चापलूसी की पराकाष्ठा और संवेदनहीनता

चापलूसी की राजनीति: ‘नमो वन’ और ‘नमो नर्सरी’ जैसी घोषणाओं पर प्रहार करते हुए जूली ने कहा कि अपनी कुर्सी बचाने के लिए जीवित व्यक्ति के नाम पर वन लगाना भारतीय परंपराओं का अपमान और चापलूसी की हद है।

मानसिक स्वास्थ्य का उपहास: बजट के दौरान मानसिक स्वास्थ्य जैसे गंभीर विषय पर वित्त मंत्री और भाजपा विधायकों के हंसी-मजाक को उन्होंने निंदनीय और शर्मनाक बताया।

शिक्षा और बुनियादी ढांचे पर प्रहार

जूली ने कहा कि 42,000 जर्जर स्कूलों पर सरकार मौन है और हिंदी की वकालत करने वाले ‘CM-RISE’ जैसे अंग्रेजी नामों का सहारा ले रहे हैं। रिफाइनरी के लोकार्पण में हो रही देरी और भरतपुर जैसे महत्वपूर्ण जिलों की अनदेखी यह साबित करती है कि सरकार के पास कोई रोडमैप नहीं है।

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