नई दिल्ली | 09 फरवरी / जैव विविधता के संरक्षण और जैविक संसाधनों के उपयोग से होने वाले लाभों के निष्पक्ष वितरण को सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने देश के 10 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में कार्यरत जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMC) को 45.05 लाख रुपये की राशि वितरित की है।
यह राशि राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों के माध्यम से लाभार्थियों तक पहुंचाई गई है। इस पहल से 90 से अधिक जैव विविधता प्रबंधन समितियों के साथ-साथ आंध्र प्रदेश के 15 लाल चंदन किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है।
इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिला लाभ
इस वितरण में तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गोवा, महाराष्ट्र, असम, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, साथ ही दिल्ली एनसीटी और लद्दाख शामिल हैं। ये बीएमसी ग्रामीण क्षेत्रों, शहरी निकायों, मैंग्रोव इलाकों और औद्योगिक क्षेत्रों जैसे विविध पारिस्थितिक परिवेशों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
जैविक संसाधनों के उपयोग से हुआ लाभ साझा
लाभ-साझाकरण की यह राशि कीटों, मिट्टी और जल में पाए जाने वाले सूक्ष्मजीवों तथा खेती की गई लाल चंदन जैसी जैविक संपदाओं के व्यावसायिक उपयोग से प्राप्त हुई है। इन संसाधनों का उपयोग विभिन्न उत्पादों के निर्माण में किया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जैव विविधता वैज्ञानिक नवाचार और जैव-अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
समुदायों की आजीविका और संरक्षण को बढ़ावा
पहुंच और लाभ-साझाकरण (ABS) व्यवस्था के तहत कंपनियों द्वारा अर्जित व्यावसायिक लाभ का एक हिस्सा स्थानीय समुदायों को लौटाया जाता है। इससे न केवल उनकी आजीविका में सुधार होता है, बल्कि वे जैव विविधता के संरक्षण के लिए भी प्रेरित होते हैं।
पारदर्शिता और संरक्षण को प्राथमिकता
एनबीए ने हाल के वर्षों में नियमों को सरल बनाते हुए पारदर्शिता और व्यापार सुगमता को बढ़ावा दिया है, साथ ही समुदायों के हितों और जैव विविधता संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। प्राधिकरण राज्यों, स्थानीय निकायों, शोधकर्ताओं, उद्योगों और समुदायों के साथ मिलकर सतत उपयोग और संरक्षण के लिए कार्य कर रहा है।
अब तक 145 करोड़ रुपये से अधिक का ABS भुगतान
इन प्रयासों के परिणामस्वरूप अब तक कुल 145 करोड़ रुपये (लगभग 16 मिलियन अमेरिकी डॉलर) से अधिक की लाभ-साझाकरण राशि वितरित की जा चुकी है। एनबीए नागोया प्रोटोकॉल के तहत भारत की अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों को निभाने के साथ-साथ कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे के लक्ष्यों की प्राप्ति में भी अहम भूमिका निभा रहा है।
