जयपुर | 09 फरवरी 2026 | प्रदेश में मेडिकल विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से चिकित्सा शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की पहल और चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के निर्देशन में अब प्रदेश के प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में वेलबीइंग सेंटर की स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही राज्य स्तर पर एक केंद्रीकृत वेलनेस सेल भी गठित की जाएगी।
चिकित्सा शिक्षा आयुक्त नरेश गोयल की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की पहली बैठक में इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में नेशनल टास्क फोर्स की रिपोर्ट पर चर्चा करते हुए मेडिकल कॉलेजों के प्रशासनिक और शैक्षणिक ढांचे में सुधार के निर्देश दिए गए, ताकि विद्यार्थियों को मानसिक संबल मिल सके।
हर कॉलेज में होंगे डीन (मेंटल वेलबीइंग)
आयुक्त ने निर्देश दिए कि प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में एक डीन (मेंटल वेलबीइंग) की नियुक्ति की जाएगी, जो विद्यार्थियों से जुड़े मानसिक स्वास्थ्य मामलों की निगरानी करेंगे। इसके साथ ही छात्रों और फैकल्टी के लिए नियमित ओरिएंटेशन कार्यक्रम अनिवार्य किए जाएंगे, जिससे मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके।
छात्रों की समस्याओं के लिए बनेगा स्टूडेंट एप
विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी मेडिकल कॉलेजों और हॉस्टल परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। छतों की बैरिकेडिंग, सीसीटीवी निगरानी और सुरक्षित कैंपस सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
छात्रों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए ग्रिवांस रिड्रेसल सिस्टम के तहत एक स्टूडेंट एप विकसित की जाएगी। साथ ही, ई-लाइब्रेरी के विस्तार और शैक्षणिक संसाधनों के आधुनिकीकरण पर भी जोर दिया गया।
सहायता समूह, योग और खेलकूद पर रहेगा फोकस
मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने के लिए कॉलेजों में सहकर्मी सहायता समूह विकसित किए जाएंगे। विद्यार्थियों को करियर काउंसलिंग और पूर्व छात्रों के अनुभवों का लाभ भी दिया जाएगा। कैंपस जीवन को तनावमुक्त बनाने के लिए योग सत्र, खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों को नियमित रूप से आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
संकट की स्थिति में त्वरित सहायता के लिए टेली-मानस हेल्पलाइन के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया गया।
24 घंटे कैंटीन और बेहतर हॉस्टल सुविधा
बुनियादी ढांचे में सुधार के तहत हॉस्टलों में बेहतर वातावरण, ड्यूटी डॉक्टरों के लिए 24 घंटे कैंटीन सुविधा और कार्यभार के तर्कसंगत निर्धारण के निर्देश भी दिए गए हैं। इन पहलों में सहयोग के लिए एनजीओ और प्रतिष्ठित सामाजिक संस्थाओं को भी जोड़ा जाएगा।
आयुक्त गोयल ने कहा कि इन सुधारों का उद्देश्य केवल कुशल चिकित्सक तैयार करना नहीं है, बल्कि मेडिकल छात्रों के लिए एक सुरक्षित, संवेदनशील और संसाधन-सम्पन्न वातावरण विकसित करना है, ताकि भविष्य के डॉक्टर मानसिक और शारीरिक रूप से सशक्त होकर राष्ट्र सेवा कर सकें।
